Rupnagar (Punjab) | Astrologer Anil Kaushal
(Performing Shraddha rituals and donations during Pitru Paksha) हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025 (भाद्रपद पूर्णिमा) से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलेगा। यह वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए श्रद्धा, तर्पण, पिंडदान और दान करते हैं।

ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है। कन्या राशि को ज्योतिष में पितृ स्थान से जोड़ा जाता है, इसलिए इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म विशेष फलदायी माने जाते हैं।
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ऐसा माना जाता है कि सूर्य के कन्या राशि में गोचर करने पर पितृ पृथ्वी लोक में अपने वंशजों के पास आते हैं और उनसे तर्पण तथा पिंडदान ग्रहण करते हैं।

यह भी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो, तो पितृ पक्ष के दौरान किए गए श्राद्ध कर्म और दान से इस दोष को शांत किया जा सकता है।
पितृ दोष के कारण जीवन में कई तरह की बाधाएं आ सकती हैं, जैसे कि विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में समस्या, धन की हानि, और घर में अशांति। इन दिनों में विधि-विधान से श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
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पितृ पक्ष के कुछ विशेष मंत्र
पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान करते समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना बहुत ही लाभकारी होता है। इन मंत्रों का जाप करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होते हैं।

- तर्पण का मंत्र: ‘ॐ अद्य अमुक गोत्रस्य अमुक-शर्मणः (पितृ का नाम) प्रेतस्य तृप्त्यर्थे जलांजलिं दास्ये।’
- पिंडदान का मंत्र: ‘इदं पिण्डं (पितृ का नाम) ते स्वधा नमः।’
- क्षमा प्रार्थना मंत्र: ‘हे पितरों, मैं आपसे जाने-अनजाने में हुई सभी गलतियों के लिए क्षमा मांगता हूं। कृपया मुझे और मेरे परिवार को अपना आशीर्वाद दें।’

उपाय और ध्यान रखने योग्य बातें
- पितृ पक्ष के दौरान, पितरों को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराना बहुत ही पुण्य का कार्य माना जाता है।
- गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों को भी भोजन देना चाहिए, क्योंकि इन्हें पितरों का रूप माना जाता है।
- इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, या नए व्यापार की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
- श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय ही करना चाहिए, क्योंकि यह पितरों के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है।
- पितृ पक्ष में गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान देना बहुत ही फलदायी होता है।

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर से कहे गए वाक्य —
“हे राजन! जब भाद्रपद की पूर्णिमा आती है, तो पितृलोक के द्वार खुल जाते हैं। पितर धरती पर आकर अपने वंशजों के घरों में विचरण करते हैं। वे तर्पण के जल से तृप्त होते हैं, पिंडदान से संतुष्ट होते हैं, और दान-पुण्य से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।”
पितृ पक्ष में श्राद्ध का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान पितरों के लिए सभी प्रकार के अनुष्ठान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे जीवन में परेशानियों का अंत होता है। सुख-समृद्धि बढ़ती है। पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज स्वर्ग लोग से हमारे साथ समय बिताने आते हैं।

पितृ पक्ष की महत्वपूर्ण तिथियां
प्रतिपदा श्राद्ध– 08 सितम्बर 2025
द्वितीय श्राद्ध– 09 सितम्बर 2025
तृतीया श्राद्ध– 10 सितम्बर 2025
चतुर्थी श्राद्ध– 10 सितम्बर 2025
पंचमी श्राद्ध– 11 सितम्बर 2025
महा भरणी– 11 सितम्बर 2025
षष्ठी श्राद्ध– 12 सितम्बर 2025
सप्तमी श्राद्ध– 13 सितम्बर 2025
अष्टमी श्राद्ध– 14 सितम्बर 2025
नवमी श्राद्ध– 15 सितम्बर 2025
दशमी श्राद्ध– 16 सितम्बर 2025
एकादशी श्राद्ध– 17 सितम्बर 2025
द्वादशी श्राद्ध– 18 सितम्बर 2025
त्रयोदशी श्राद्ध– 19 सितम्बर 2025
मघा श्राद्ध– 19 सितम्बर 2025
चतुर्दशी श्राद्ध– 20 सितम्बर 2025
सर्वपितृ अमावस्या– 21 सितम्बर 2025
